बिछड़ा राजकुमार | Cartoon Story | Hindi Moral Stories | Hindi Kahaniyan
बिछड़ा राजकुमार | Cartoon Story | Hindi Moral Stories | Hindi Kahaniyan आज मैं जंगल में घूम-घूम कर थक गया हूं। मुझे अभी तक शिकार नहीं मिला, बहुत जोरों से भूख लगी है, आज लगता है भूखा ही रहना पड़ेगा, जंगल में मुझे कोई शिकार नहीं मिला, इसलिए आज गांव में चलकर देखता हूं शायद वहां कोई शिकार मिल जाए, इसके बाद लोमड़ी गांव में चली जाती है, वहीं पास में राजा की दासी राजा के बच्चे को झूले में झूला रही थी, तभी लोमड़ी पहुंच जाती है, लोमड़ी को देखकर दासी बच्चे को छोड़कर भाग जाती है, और लोमड़ी बच्चे को लेकर जंगल की तरफ चली जाती है, राजा की दासी दौड़ते हुए राजा के पास जाती है और राजा से सारी बात बताती है, महाराज बच्चे को लोमड़ी उठा ले गई, यह कैसे हो सकता है, तुम्हारे रहते बच्चे को लोमड़ी उठा ले गई, नहीं महाराज मेरे हाथों से लोमड़ी छीन करके बच्चों को लेकर भाग जंगल कि तरफ भाग गई, मैं बहुत कोशिश की लेकिन उससे नहीं छोड़वा पाई, इस दासी को जेल में डाल दो। आज मैं इस बच्चे का भोजन करूंगा, इसके नरम और मुलायम शरीर है, आज भोजन करने में बहुत ही मजा आएगा, तभी वहां कुछ दूरी पर बैठा शेर देख ले...