ईमानदारी का फल | Hindi Story | Imandari ka fal
ईमानदारी का फल | Hindi Story | Imandari ka fal Hindi kahaniyan गांव में तो सब जगह अकाल की परिस्थिति हो गई है। लगता नहीं कि अब इस गांव में ज्यादा दिन रुकना उचित होगा। काम के लिए बाहर गांव तो जाना ही पड़ेगा। भूषण काम की तलाश में दूसरे गांव की ओर निकल पड़ता है। चलते-चलते वह विजयपुर गांव में आ जाता है। वहां उसका रहने का कोई ठिकाना नहीं था और उसके पास कोई काम भी नहीं था। चलते-चलते वह एक अमीर किसान जगत सेठ के पास आ पहुंचता है। सेठ जी, मैं भूषण दूसरे गांव से आया हूं। हमारे गांव में अकाल की परिस्थिति हो गई है। लोगों के खेत सूखे पड़े हैं। गांव में बूंदबूंद पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। अगर मुझे आपके पास कुछ काम मिल जाएगा तो बहुत कृपा होगी बड़े भाई। अरे रे रे लगता है तुम्हारी हालत बहुत खस्ता हो गई है। ठीक है। वैसे मेरे पास एक काम तो है पर लगता नहीं कि तुम वो कर पाओगे। सेठ जी, आप चिंता ना करें। मुझे आप कोई भी काम दे सकते हैं। मैं वह काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करूंगा। अच्छा ठीक है भूषण। तो कान खोलकर सुन लो। मेरे पास तीस गाय और तीस भैंस हैं। तुम्हें हर रोज उन जानवरों का गोबर निकालना होगा। और...